अखिलेश की ‘साइकिल’ को पंचर करने में जुटा परिवहन विभाग

-मुजाहिद जैदी
Captureलखनऊ। उत्तरप्रदेश परिवहन निगम ने रोडवेज बसों से आने वाले यात्रियों व काम के सिलसिले में ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाले लोगों, खासतौर पर ग्रामीण मजदूरों को काम पर जाने के लिए साइकिल देने की योजना शुरू की थी। परिवहन निगम का दावा था कि इस योजना से न केवल वातावरण शुद्ध रहेगा बल्कि टैम्पो व निजी बसों में मनमाने ढंग से लिए जाने वाले भाड़े की भी बचत होगी। लेकिन लखनऊ के कैसरबाग बस अड्ïडे पर खड़ी साइकिलें अभी तक धूल फांक रही हैं।
अखिलेश सरकार ने अपने तीन साल के कार्यकाल में बहुत सारी योजनायें लागू की मगर उसमें से कितनी योजनायें आने के बाद बेकार साबित हो गयी। इसी कड़ी में यह साइकिल की योजना भी थी मगर इसका जनाजा निकल गया। यह योजना अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट में भी शामिल थी। पिछले साल परिवहन विभाग ने फैसला किया था की जो मजदूर और काम करने वाले लोग लखनऊ आते हैं उन्हें बस अड्ïडे पर ही साइकिल किराये पर मिले और अपनी आईडी और कुछ पैसा जमा कर मजदूर अपना काम खत्म करने के बाद साइकिल वापस कर दे। अब इन साइकिलों को कोई न पूछने वाला है और न कोई लेने आता है। यह योजना पहले लखनऊ के कैसरबाग और आलमबाग बस अड्ïडों पर लागू की गयी थी और अब साइकिलों की हालत तो ये है कि सारी साइकिलें धूल फांक रही हैं। महीनों से इन साइकिलों को चलाया नहीं गया है।
सवाल यह है कि अगर योजनाओं को ठीक ढंग से लागू नहीं करना है तो आखिर किसलिए योजनायें बनाते हैं। आम आदमी की गाढ़ी कमाई को इस तरह बर्बाद क्यों किया जा रहा है। कल जहां परिवहन निगम की करोड़ों की बसों और वाटर एटीएम को लांच किया वहीं दूसरी तरफ जो योजनायें पहले शुरू की गयी थीं उनका कोई पुरसाहाल नहीं है।
अखिलेश यादव व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव बार बार अपने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हैं कि जो योजनायें सरकार शुरू करती है उसको जन जन तक पहुंचाया जाये लेकिन यह सिलसिला नसीहतों तक ही रह जाता है। जाहिर है यूपी सरकार ने जितनी भी योजनायें लागू की है उनमें से काफी योजनायें लटकी हुयी हैं। परिवहन विभाग जैसे बड़े विभाग में ऐसे कितने मामले हैं जो खस्ताहाल हैं। आकड़ों के हिसाब से परिवहन विभाग को हर दिन डग्गामार बसों के कारण करीब 2 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है लेकिन परिवहन विभाग जैसे सोया हुआ है। यह विभाग न अपनी योजनाओं को अच्छी तरह से लागू कर पा रहा है और न ही नुकसान को रोकने में कामयाब है। आखिर अखिलेश के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का जिम्मेदार कौन है ।

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