अखबार छोटा या बड़ा नहीं होता: राम बहादुर राय

  • समाज को सच्चाई दिखाना ही पत्रकारिता का मुख्य उद्ïदेश्य: संजय शर्मा
  • स्व. विद्यासागर वसिष्ठï की पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में पत्रकारों ने रखे अपने विचार

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureनयी दिल्ली। कोई अखबार छोटा बड़ा नहीं होता। मणिपुर की घाटी में इम्फाल जैसे छोटे शहर में ढाई सौ अखबार निकलते हैं। असल में, अपने समय के साथ बातचीत ही पत्रकारिता है। उक्त विचार पत्रिका यथावत के संपादक रामबहादुर राय ने स्व. विद्यासागर वसिष्ठï की 32वीं पुण्यतिथि पर अग्रसर के तत्वावधान में छोटे शहर के छोटे अखबार विषय पर आायोजित पत्रकारित-विमर्श गोष्ठी में बतौर अध्यक्ष बोलते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि अपना अखबार निकालने की व्यवस्था और पत्रकारिता दोनों अलग हैं। समाज की सत्ता समाप्त हो चुकी है। नतीजन मूल्यों का क्षरण हुआ है। इसी सब के बीच ईमानदार लोग भी हैं जो निष्ठïा से कार्य करते हैं जिनसे आशा की किरण बंधती है।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता लखनऊ से आये वीकएंड टाइम्स साप्ताहिक तथा 4 पीएम सांध्य दैनिक के संपादक संजय शर्मा ने उत्साहजनक व प्रतिबद्धता पूर्ण शैली में कहा कि मैंने अखबार की स्थापना तथा सफलता के लिए उचित प्लानिंग और मार्केटिंग की लेकिन अपनी अस्मिता पर कभी आंच नहीं आने दी। किसी कार्यक्रम या घटना को किसी के निर्देशानुसार कवरेज नहीं किया। सच्चाई को छापा क्योंकि हम पत्रकार ही तथ्य को नहीं छापेंगे तो कौन छापेगा? बेशक गालियां ही क्यों न हों। इस कारण छोटे शहर के छोटे अखबार की चर्चा बड़े शहर में हुई। आज छोटे-बड़े सभी अखबारों के लिए पैसा ही सबकुछ होता जा रहा है। अखबारों के मूल्यों और आदर्शों को बनाये रखना एक चुनौती भी है जरूरी भी है, क्योंकि समाज को पत्रकारों से बड़ी अपेक्षाएं होती हैं।
इस अवसर पर पीआईओ टीवी के संपादक केएन गुप्ता ने कहा कि आज से लगभग चालीस साल पहले का युग पत्रकारिता की दृष्टिï से स्वर्णिम युग था। तब अलग-अलग अखबारों की नीतियां भले अलग-अलग थीं, पर अखबार मालिकों का पत्रकारों पर इतना दबाव नहीं था। धीरे-धीरे हाल और खराब ही हुए हैं। छोटे अखबार हमेशा संघर्ष करते रहे हैं।
गोष्ठïी की शुरूआत करते हुए ब्रज गरिमा सांध्य दैनिक संपादक विनोद चूड़ामणि ने अपने लिखित आलेख में बताया कि प्रेस रजिस्टार से सभी अखबारों को समान दर्जा प्राप्त है। परंतु सरकार ने मूलत: विज्ञापन की दृष्टिï से वर्गीकरण किया है। कथित छोटे अखबार कई तरह की समस्याओं से जूझते हुए शहरों में जनचेतना को प्रसारित करने में महत्वपूर्ण निभा रहे हैं। परंतु चिंता की बात यह है कि बड़े-छोटे सभी अखबार आज अपना मिशन भूल बैठे हैं।
विमर्श में हिस्सा लेते हुए एनडी टीवी के राजीव रंजन गिरि ने कहा कि किसी राज्य या क्षेत्र के छोटे हिस्से की घटना को पूरे राज्य की घटना के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। कश्मीर या उत्तर-पूर्व की सच्ची तस्वीर ही पेश की जानी चाहिए। दूरदर्शन के पूर्व प्रोडï्यूसर महेन्द्र ऋषि ने कहा कि भावी पत्रकारों को सही दिशा देने से ही पत्रकारिता पर आयी फफूंद कट सकती है। पत्रकार सतीश सागर ने कहा कि छोटे अखबरों में प्रकाशित समाचारों तथा अन्य सामग्री में स्त्रोत का जिक्र नहीं होता। प्राय: सभी सामग्री भर्ती की सी लगती है अपील नहीं करती है। द हिन्दू के पूर्व रिपोर्टर विनय ठाकुर ने बताया कि कई वर्ष पूर्व जब मध्यप्रदेश में चुनाव की वह कवरेज कर रहे थे तो वहां के स्थानीय छोटे अखबार सभी प्रत्याशियों को जिता रहे थे। आज हर जगह पेड न्यूज का बोलबाला है। इसके अतिरिक्त ईश्वर भारद्वाज, नवाब केसर आदि ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। गोष्ठïी का संचालन सुभाष वसिष्ठï ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में आगरा से पधारे गीतकार सोम ठाकुर तथा व्यंग्कार डा. हरीश रावत की अध्यक्षता में सरस कवि गोष्ठïी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में तकरीबन 18 कवियों ने अपनी रचनायें पढ़ीं। अध्यक्ष डा. नवल ने प्रत्येक कविता पर सटीक समीक्षात्क टिप्पणी प्रस्तुत की। अग्रसर-गोष्ठिïयों की विगत तीन दशक की यात्रा में ऐसा पहली बार हुआ कि कविताओं, गीतों, गज़लों के माध्यम से कवियों ने जहां एक ओर प्रेम से वातावरण को रससिक्त किया तो दूसरी ओर सम-समायिक विषयों-संदर्भों पर व्यंग्यपरक धारदार टिप्पणी की। सोम ठाकुर, शान्ति अग्रवाल, स्नेह सुधा नवल, विजय मेहरोत्रा, सुभाष वसिष्ठï, रंजना अग्रवाल, कुमार अनुपम, सतीश सागर, महावीर खांल्टा, पूनम अग्रवाल, नवाब केसर, मालती महार्षि, गीता झा, अजित वरदान, इन्दु भारद्वाज, दिनेश कपूर, अतुल बल तथा नीति भारद्वाज ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन डा. सुभाष वसिष्ठï ने किया।

 

 

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