अक्षय पात्र संस्था को बचाने में जुटे अधिकारी

दूध के नमूनों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने से बच रहा प्रशासन

 4पीCaptureएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मध्याह्न भोजन योजना के तहत 72 हजार स्कूली बच्चों को दूध की सप्लाई करने वाली संस्था अक्षय पात्र को बचाने की प्रशासन हर संभव कोशिश कर रहा है। लखनऊ के जिन दो स्कूलों में अक्षय पात्र ने फ्लेवर्ड दूध सप्लाई किया था और उसको पीने से 60 बच्चे बीमार हो गये थे, उस दूध के नमूने की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें दूध के दोनों नमूने फेल पाये गये हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से बच रहे हैं। इससे प्रशासनिक अधिकारियों की मंशा स्पष्ट हो रही है।
मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत परिषदीय स्कूलों में पढऩे वाले सभी बच्चों को 16 जुलाई को पहली बार स्कूलों में 200 ग्राम दूध पीने के लिए दिया गया था। इसी दिन क्वींस इंटर कालेज में बच्चों को दोपहर में खाने के लिए परोसे गये खाने में कीड़ा मिला। इसके बाद 23 जुलाई को छावनी क्षेत्र में बीए बाजार स्थित दो स्कूलों में फ्लेवर्ड दूध पीने से 60 बच्चे बीमार हो गये। इस घटना में स्कूली बच्चों, स्कूल प्रशासन, पराग संस्था और अक्षय पात्र संस्था को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसमें मौखिक बयान के अनुसार प्रथम दृष्टया स्कूल में दूध सप्लाई करने वाली संस्था अक्षय पात्र की गलती मानी गई। पराग के प्रबंधक डीके सिंह ने स्पष्ट बोल दिया कि उनकी फर्म से अक्षय पात्र संस्था ने फ्लेवर्ड दूध की मांग की थी। इसके साथ ही दूध ले जाने में अपना बर्तन इस्तेमाल करने की जिद की थी। इसके बाद दूध को गर्म नहीं किया गया होगा, जिसकी वजह से फ्लेवर्ड दूध पीना स्कूली बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो गया। वहीं स्कूल की छापेमारी में अक्षय पात्र संस्था की तरफ से खाने का सामान सप्लाई करने वाले बर्तनों में भी गंदगी मिली थी। बर्तन में बासी खिचड़ी भी मिली थी। इसके बावजूद अधिकारियों ने अक्षय पात्र संस्था को बचाने के लिए मामले को दबा लिया। प्रशासन प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गये नमूनों का बहाना बनाकर अक्षय पात्र संस्था को बचाता रहा। आलम ये है कि प्रयोगशाला से दूध के नमूनों की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें दोनों नमूने फेल पाये गये हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है।

बच्चों को मिलेगा गरम दूध

शासन स्तर से मध्याहन भोजन योजना के अंतर्गत स्कूलों में दूध बांटने की अनुमति मिल गई है। अब अक्षय पात्र संस्था को भी स्कूलों में खीर की बजाय दूध ही वितरित करना होगा। इस संबंध में मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की तरफ से स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। लेकिन लखनऊ में दूध से नमूनों की जांच रिपोर्ट फेल होने की वजह से अधिकारी असमंजस की स्थिति में हैं। उनके सामने विश्व स्तर पर अपनी गुणवत्ता को लेकर ख्याति अर्जित कर चुकी अक्षय पात्र संस्था को बचाने और स्कूली छात्रों के स्वास्थ्य की रक्षा दो प्रमुख मुद्दे हैं। ये दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए स्कूली बच्चों को दूध पीने के लिए वितरित करने का मामला अधर में लटका है। लखनऊ में मात्र 15-20 प्रतिशत स्कूलों में ही बुधवार को बच्चों को मध्याह्न भोजन योजना के अतंर्गत दूध पीने के लिए दिया गया। इसमें बहुत से स्कूलों में बच्चों ने दूध पीने से भी इंकार कर दिया।\

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