अंबेडकर के बाद अब रविदास से आस, पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर केजरीवाल तक जुटे

प्रधानमंत्री के बनारस दौरे के दौरान लोगों को काले कपड़े पहनने पर पाबंदी

O14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में हैं। मौका रविदास जयंती का है। अंबेडकर के बाद यह किसी दूसरे दलित राजनीतिक प्रतीक को हथियाने की तैयारी है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश के नए राजनीतिक समीकरण तलाशने की भी जुगत है। संत रविदास की जयंती के बहाने पूर्वांचल से लेकर पंजाब तक के रैदासी समाज को साधने की कोशिश भी हो रही है।
लेकिन क्या देश के मौजूदा हालात में संत रविदास और उनकी सीख की बस इतनी ही अहमियत है कि उनके नाम पर उनसे जुड़े समाज को वोट बैंक के रूप में जोड़ सके। संत रविदास की जन्मस्थली सियासत का कुरुक्षेत्र बनती दिख रही है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी और दूसरी पार्टियां भी खांसे सर्तक हो गयी हैं।
आनन-फानन में ही सही इन पार्टियों ने अपना भी अलग रविदास जयंती पर कार्यक्रम रख लिया है, लेकिन इस पूरी सियासी गहमा-गहमी के बीच वो रविदास तो कहीं खो ही गए जिनके लिए इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म रहा। जिस संत रविदास पर सियासी कसरत हो रही है वह हमेशा से कुरीतियों को दूर करने और जाति, वर्ग और धर्म की दूरियों को मिटाने की कोशिशों में लगे रहे। लेकिन यहां तो बस चुनावी गणित है। उत्तर प्रदेश के साल 2017 के चुनावों पर सभी पार्टियों की नजरें हैं।इसी के तहत भाजपा ने आज संत रविदास की जयंती मनाने का फैसला लिया है। केजरीवाल भी रविदास जयंती पर बनारस पहुंच रहे हैं। साफ है कि प्रदेश में 2017 के चुनावी संग्राम को देखते हुए सभी दलों ने दलित वोटों को रिझाने की कवायद शुरू कर दी है।

मंदिर में सेवादारों का हंगामा
पीएम मोदी के रविदास मंदिर में आने को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे। लेकिन यही सुरक्षा हंगामे का कारण भी बन गई। जब सुरक्षाकर्मियों ने रविदास मंदिर के मुख्य पुजारी निरंजन दास को मंदिर में घुसने से रोका तो वहां मौजूद सेवादारों ने जमकर हंगामा किया। सेवादारों ने मोदी वापस जाओ के नारे भी लगाये। सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा कारणों से ही दास को अंदर जाने से रोका था।

‘मोदी गो बैक’ के नारों से फिर हुआ सामना
आज एक बार फिर मोदी गो बैक के नारो से प्रधानमंत्री को दो चार होना पड़ा। प्रधानमंत्री रविदास जयंती के मौके पर सिर गोवर्धन मंदिर पहुंचे थे, जहां उनका जमकर विरोध हुआ। यहां बहुजन समाज पार्टी के लोगों ने ‘मोदी गो बैक’ के नारे से उनका स्वागत किया। इसके अलावा सिर गेट पर बहुजन मुक्ति मोर्चा के सदस्यों ने मोदी को काले झंडे भी दिखाए। इस तरह से प्रधानमंत्री का यह दौरा फिर से एक बार विरोध के बीच छाया रहा।

रोहित वेमुला की आत्महत्या
जेएनयू से पहले भी हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या को लेकर सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था। मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लखनऊ के बाबा साहब भीवराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्रों ने नारेबाजी की थी।

दौरे के क्या हैं मायने?

पंजाब और यूपी दोनों राज्यों में ही संत रविदास के फॉलोअर्स का काफी मजबूत वोट बैंक है। इस लिहाज से मोदी और केजरीवाल का यह दौरा इलेक्शन के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।
यूपी में अगले साल असेंबली इलेक्शन होने वाले हैं। पंजाब में भी इस साल इलेक्शन है। संत रविदास के लाखों फॉलोअर्स 22 फरवरी को काशी में जुटेंगे।
दलित कम्युनिटी के इस वोट बैंक पर वैसे तो बीएसपी की भी नजर रही है। हालांकि, पंजाब में उसकी पकड़ बीजेपी जितनी मजबूत नहीं है।

जेएनयू का मुद्दा नहीं छोड़ रहा पीछा

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी का मुद्दा पीछा नहीं छोड़ रहा है। कन्हैया की गिरफ्तारी मामले में कई तरह के फर्जी वीडियो आने के बाद मामले की आंच प्रधानमंत्री मोदी को अपने लपेटे में लेती दिखाई पडऩे लगी है। जेएनयू मामले को लेकर एक तरफ जहां विपक्षी दल सत्ताधारी पार्टी को निशाने पर ले रहे हैं, वहीं जेएनयू छात्रों में भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अब गुस्सा नजर आने लगा है। कन्हैया की गिरफ्तारी में जिस तरह से जल्दबाजी में कार्रवाई की गयी, इससे पूरा मामला केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जाता दिखाई दे रहा है

सपा कार्यालय में मनाई गई रविदास जयंती
सपा कार्यालय पर रविदास जयंती धूमधाम से मनाई गयी। सपा अनुसूचित जाति के प्रदेश अध्यक्ष ने यहां कहा कि रविदास के आदर्शों पर सपा चल रही है। बसपा प्रदेश में अपना आधार खो चुकी है जिस वजह से उसकी मुखिया बौखलाहट में कुछ भी उल्टा सीधा बोल रही हैं। गौरतलब है कि बसपा मुखिया ने आज कहा कि सपा को रविदास जयंती मनाने को कोई नैतिक अधिकार नहीं हैं।

मायावती का सपा पर हमला
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सपा को रविदास जयंती मनाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। मायावती ने यह भी कहा कि बसपा सत्ता में आई तो भदोही जिले का नाम फिर से बदल दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बसपा संत रविदास के आदर्शों पर चल रही है। सपा रविदास जयंती मनाने का ढोंग कर रही है।

Pin It