अंग प्रत्यारोपण प्लास्टिक सर्जरी का ही एक हिस्सा: डॉ. रमेश

जल्द ही प्लास्टिक सर्जरी में भी होगा स्टेम सेल का प्रयोग

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। अंग प्रत्यारोपण प्लास्टिक सर्जरी का ही एक अंग है,पहली बार किडनी प्रत्यारोपण अमेरिका के प्लास्टिक सर्जन डॉ. जोसेफ ने 1954 में किया था। यह कहना है, पीजीआई चंडीगढ़ के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ.रमेश शर्मा का। उन्होंने केजीएमयू में एसके भटनागर की याद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्लास्टिक सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए कहीं। उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी और अंग प्रत्यारोपण के बारे में भी विस्तार से बताया।
डॉ. जोसेफ ने बताया कि आने वाले समय में स्टेम सेल का प्रयोग जल्द ही प्लास्टिक सर्जरी की दुनिया में बड़े बदलाव ला सकता है। स्टेम सेल के प्रयोग से अंगों के पुनर्निर्माण में मदद मिल सकती है। मौजूदा समय में हो रहे प्रयोगों मे सफलता मिलने लगी है। आने वाले समय में प्लास्टिक सर्जरी में भी इसका प्रयोग होने लगेगा। कान, नाक व अन्य अंगों का भी निर्माण होने लगेगा, जो कि वास्तविक लगेंगे। इस अवसर पर उन्होने यह भी बताया कि यूएसए में चेहरा प्रत्यारोपण भी शुरू हो चुका है,वहां जले हुए मामलों मेें लगभग 20 प्रतिशत लोगों ने अपना चेहरा प्रत्यारोपण सफलता पूर्वक कराया है। आने वाले समय में चेहरा प्रत्यारोपण यहां भी होने लगेगा। इसके अलावा उन्होंने बताया कि बालों को केमिकल वाले शैंपू व साबुन से नहीं धोना चाहिए । ये केमिकल सिर की गंदगी को साफ करने के साथ ही बालों की जड़ों को भी कमजोर करते हैं। जिससे बाल झडऩे की समस्या सबसे ज्यादा होती है। बाल झडऩे के दौरान सिर में पीछे के बाल कम झड़ते है। उन्होंने बताया कि हेयर प्रत्यारोपण करने में आठ से नौ घंटे का समय लगता है। इस दौरान बाल प्रत्यारोपण कराने वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए, हमेशा हेयर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ से ही कराने चाहिए। केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. एके सिंह ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी में लगातार विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि नयी तकनीक से एक्सीडेंटल मरीजों को जीवनदान मिलने लगा है। लेकिन आज भी प्लास्टिक सर्जरी का सही मायने में सामान्य लोगों में सही से प्रसारित न होने के कारण ,जरूरत मंदों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस गोष्ठी में डॉ. विजय कुमार व अन्य वरिष्ठ चिकित्सक भी मौजूद थे।

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